Thursday, October 19, 2006

दोस्तों...

यह इस ब्लोग की अखिरी हिन्दी चिट्ठा है। लेकिन घबराओ मत: आज से मैं यहाँ पर लिखूँगा। मैने हमेशा महसूश किया था कि इस ब्लोग का शीर्षक थोरा-सा अजीब था हिन्दी-ब्लॉग के लिए, तो अभी क्योंकि मैंने इतने समय से उसपर नहीं लिखा है, इसलिए मुझे लगता है कि अब एक नया शुरुआत का मौका है। तो मुझे बहुत उम्मीद है कि आप लोग मेरी नई ब्लॉग पढ़ें जो इस ब्लॉग पढ़ते थे।

फीर भी मुझे इस शीर्षक से बहुत पसन्द है... शायद मैं एक अंग्रेज़ी ब्लॉग शुरू करूँ... हम देखेंगे!

Friday, October 06, 2006

दिल्ली जा रहा हूँ...

दिल्ली! सवैद जीता रहता तो पुरे तरह से नहीं जानता वह शहर। लेकिन इस बार ऊ०पी० और जयपुर में रहने के बाद समझ सकता हूँ कि वह बढ़िया शहर है, और अभी मैं उससे राज़ी हूँ जिसने कहा कि दिल्ली कुछ वक्त में और सिर्फ़ कुछ लोगों को अपनी रहस्य बतलाएंगी। तो चला जा रहा हूँ। अभी ज़िन्दगी थोरी-सी चकरायी ही, लेकिन उम्मीद रखूँगा, दोस्तों!

Thursday, October 05, 2006

दोस्तों!

तो क्या कोई लोग इस चिट्टी अभी तक पढ़ता है?

माफ़ कीजिएगा: क्या हुआ? मेरा कोई सफ़ाई नहीं, बस यह है कि इन पिछले तिनों (चारों) महिनों में मैं बहुत मस्रूफ़ था।

क्या हुआ?

छोटा-सा लिस्ट बना सकता: लखनऊ, नस्तलीक़, मायावटी का घर, पुरानी हवेलियाँ, फूलों की घाटी, अमीबज़, किन्नौर और स्पीटी, जयपुर, और अखिरी... खैर, मुझे हमेशा कुछ उम्मीद है--कहानी निरंतर है...

जितने घनटे मैने आने से पहले बस में गुज़ारे, मैं इन पिछले महिनों में और गुज़ारे है। और अब नई यॉर्क एक गुज़्रिश्ती याद है जो ज़्यादातर खाने के रूप में उठाता है (मैं अभी कहता हूँ कि इंडिया में अच्छा पित्ज़ा नहीं मिलेगा: कोई सुझाव?)।

ज़िंदगी कभी मुश्किल है, कभी आसान, लेकिन हमेशा दिल्चस्प। अगर आप लोग माफ़ कर दे सकते हैं मेरा ग़ैरहाज़ीर, तो मैं सभी के बारे में बात करूँगा: और इतनी बातें हैं बताने लिए? उसकेपास कुछ कहानियाँ हैं जो दोनों लखनऊ और जयपुर में रहा एक साल में रहा!

लेकिन अभी एक सवाल: क्या किसिने 'कितने पाकिस्तान' कभी पढ़ी? वह भी बात है...

Monday, March 27, 2006

ब्रुक्लिन में एक पाठक है

आज अपने साइटमीटर को देखते-देखते मुझे ध्यान आया कि ब्रुक्लिन में एक पाठक है मेरे ब्लोग का। मुझे बहुत दिलचस्प लगती है इस बात और मुझे अश्चर्य भी है। आप कौन है और कैसे आये है आप? मत घबराए, मुझेसे डरना का कारण नहीं है :)

Wednesday, March 22, 2006

एक अनुरोध

मुझे एक प्रस्तुत करना चाहिए मेरी क्लास के लिए अगले हफ़्ते और फ़ैसला किया कि मैं अपने ब्लोग और पुरे चिट्टाजगत के बारे में बात करूँगा। इस लिए आशा है कि आप लोग मुझेसे बताएं कि ब्लोग क्यों लिखते हैं, या अगर आप ब्लोग न लिखते तो ब्लोग क्यों पढ़ते हैं। हिन्दी चिट्टजगत बहुत नया ही है और अब बहुत छोटा है, लेकिन संख्या बढा जा रहा ह और नई विषय भी दिखाई देते हैं। इसलिए शायद अगले साल नई दुनिया हो जाएगी जो आज नई शहर है।

संस्कृति की दृष्टि से क्या यह नई लेखने की शैली हिन्दी सहित्य में जुड़ी जाएगी (अगर वह गलत माफ़ कीजिए) या अलग रखेगी? और क्या यह शैली दुसरी संस्कृति में शामिल है या नहीं, और अगर है तो कैसी?

लेकिन वह गम्भीर बात ही है। हम सब ज़्यादातर मज़ा के लिए पढ़ते है न? तो चिट्टाजगत में मज़ा क्या है? मेरी स्थिथि में फ़र्क है कि मैं हिन्दी का छात्र हूँ और मेरेलिए मज़ा की बड़ी बात है कि इस ब्लोग से अलग-अलग हिन्दी बोलनेवाले से बात कर सकता हूँ और भी आसान रूप से। लेकिन मत्सू भाई के छोड़कर ज़्यादातर आप लोग भाषी है और कोई अलग मज़ा मिलते हैं| आप में से कुछ लोग भारत में रहते हैं, लेकिन कुछ लोग अलग-अलग देशों में रहते हैं। और भी मैंने पढ़ा है कि कुछ लोगों के लिए हिन्दी लिखना एक फ़ैसला ही है और फ़ैसला है कि अंग्रेज़ी में न लिखना। तो यह सब क्या मतलब है आप के लिए?

बताये न और मैं आपके शबदों का इस्तेमाल करूँगा और आप जाएंगे कि एक छात्र बचा दिया। सच में मुझे थोड़ी-सी परेशान है कि यह खोखली-सी प्रस्तुत होगी क्योंकि दुसरे छात्रों ने पेश किया अलग-अलग बहुत गंभीर संस्कृतिक विषयों पर और मैं ब्लोग के बारे में बात करूँगा।

और भी आखीर मज़ा की बात होगी अगर कोई चरचा पैदा होगा, न?

Tuesday, March 14, 2006

हंस से चीढ़ आ रही है...

यह पात्रिका पढ़ना चाहता हूँ, लेकिन फ़ोंट टुटी-फुटी ही है... युनिकोड में नहीं है, तो समाधान क्या है? क्या मुझे कोई खास फ़ोंट दौनलोड करना पड़ता है?

Monday, March 13, 2006

एक अच्छी कविता अंग्रेज़ी बोलनेवाले छात्रों लिए...

यह कविता मुझे बहुत अच्छी लगी क्योंकि रोबर्ट फ़्रोस्ट की प्रसिद्ध कविता के प्रति एक प्रतिक्रिया जैसी थी... पता नहीं 'रूपाँतरण' का मतलब क्या लेकिन सोच रहा हूँ कि "interpretation" हो सकता है...

इस पहले हफ़्तेअंत में बहुत-बहुत काम था, रोज़भर... आज भी... अगर कुछ समय पायूँ तो कल ही लिखूँगा कुछ और...
World Map