दोस्तों!तो क्या कोई लोग इस चिट्टी अभी तक पढ़ता है?
माफ़ कीजिएगा: क्या हुआ? मेरा कोई सफ़ाई नहीं, बस यह है कि इन पिछले तिनों (चारों) महिनों में मैं बहुत मस्रूफ़ था।
क्या हुआ?
छोटा-सा लिस्ट बना सकता: लखनऊ, नस्तलीक़, मायावटी का घर, पुरानी हवेलियाँ, फूलों की घाटी, अमीबज़, किन्नौर और स्पीटी, जयपुर, और अखिरी... खैर, मुझे हमेशा कुछ उम्मीद है--कहानी निरंतर है...
जितने घनटे मैने आने से पहले बस में गुज़ारे, मैं इन पिछले महिनों में और गुज़ारे है। और अब नई यॉर्क एक गुज़्रिश्ती याद है जो ज़्यादातर खाने के रूप में उठाता है (मैं अभी कहता हूँ कि इंडिया में अच्छा पित्ज़ा नहीं मिलेगा: कोई सुझाव?)।
ज़िंदगी कभी मुश्किल है, कभी आसान, लेकिन हमेशा दिल्चस्प। अगर आप लोग माफ़ कर दे सकते हैं मेरा ग़ैरहाज़ीर, तो मैं सभी के बारे में बात करूँगा: और इतनी बातें हैं बताने लिए? उसकेपास कुछ कहानियाँ हैं जो दोनों लखनऊ और जयपुर में रहा एक साल में रहा!
लेकिन अभी एक सवाल: क्या किसिने 'कितने पाकिस्तान' कभी पढ़ी? वह भी बात है...