Monday, December 12, 2005

सब फ़ीर ह्न्सें, न जाने क्यों?

What's that again? Why not going... go why not, why not laught?... any help?

Wednesday, December 07, 2005

Buts are in Order

लेकिन--from Ar./Pers. lekin. however, but
मगर--from Pers. magar. even though, but
पर--from ... whatever, but, still
किंतु--from Sans. but, however; still, nevertheless

Did I miss any of them? And more importantly, can anyone tell me the difference between all of these? लेकिन I'm pretty sure about, more of a subject changing "on the other hand" kind of word, but the difference between the other three? पर is really short, so i guess that's nice, and किंतु certainly sounds fancy... and there's a connection of somekind between मगर and अगर, right?

English, I'm thinking to myself, of course has the same array of ways to disagree (of course!) but I love that Hindi can shrink them down into these nice, packed, one-word changes that (I'm sure) have vast shifts in register... for instance, just a guess, but if I were to say किंतु instead of मगर or पर I suspect I would sound snobby... but who knows? Maybe someone somewhere will someday yell at me and tell me that the only way to say 'but' in Hindi is किंतु...

Tuesday, December 06, 2005

नासमझ का फ़ायदा (दुसरा पाठ)

इस जैसे काम के लिए मेरी हिंदी अच्छी नहीं थी। मुझे कुछ मदद चाहिए। मैं एस० ऐ० टी० की क्लास सीखाता हूँ जिसमें अक्सर कुछ हिंदी या ऊर्दू बोलनेवाले विध्यारथी हैं। कभी-कभी मैं उनसे हिंदी में बात किया करता हूँ और कोई हिंदी की बात के बारे में पुछा करता हूँ। वैसे विद्यार्थों को मैने यह वाक्य दिखाई। उसने पढ़ी... और मुझे यह बयाया कि इस वाक्य का मतलब ही है कि नौजवान लड़के ने आत्महत्या की थी।

सहसा यह कहानी थोड़ी-सी आजीब हो गयी थी। अगले दिन मैने दुबारा पड़ी। और भी मैने 'आत्मा' का मतलब शब्दकोश में तलाश किया। इस बार मुझे लगा कि 'आत्मा' का एक और मतलब है जो अंग्रेज़ी में 'ghost' जैसा है।

इस अनुभूती ने कहानी में बड़ी फ़र्क पैदा किया। जैसे ही मैने इस शब्द का अर्थ सीखा वैसे ही सारी कहानी का मतलब बदल हो गया। मैने तीसरा बार कहानी पढ़ी। और इस बार पड़ते-पड़ते मुझे समझ आयी कि सब लोगों को देहांत हुए!

'सिक्स्थ सेंस' के अंत (जिसमें फ़िल्म के अंत में मुख्यपात्र को समझ अयी कि ख़ुद मौत है) जैसी एहसास मुझे आयी। अब बड़े द्यान से पढ़ रहा था और एक के बाद एक खोजें आ रहीं थीं। जब "एक साधू बैठा... बड़बड़ा रहा था 'साधू-संत के प्राण लेना खेल नहीं है'" तब अपने ही प्राणे के बारे में बड़बड़ा रहा था! और दुसरे-दुसरे हिस्सों के मतलब साफ़ हो गए। एक बार जब यात्राएं ट्रेन से उतरते हुए पुछते है "स्वर्ग आ ग्या क्या?" तब असली ही स्वर्ग के बारे में पुछ रहे हैं। बहुत माज़ा ही है।

और देखिए न-- अगर मुझे पुरी हिंदी आयी होती तो यह आश्चर्य नहीं होता। और मेरेलिए यहीं आश्चर्य कहानी के सबसे अच्छे हिस्सा था। तो यहीं नासमझ का फ़ायदा है कि हम अपनी नासमझ से सीखते जा रहे हैं। तो इस वजह से अज्ञान कभी-कभी बहुत अच्छा चीज़ होगा। लेकिन हमेशा नहीं।
नासमझ का फ़ायदा

(यह तो पहला पाठ है। दुसरा पाठ बाद में लीखूँगा)

इस हाफ़्तेअंत मैने "अतृप्त आत्माओं की रेल-यात्रा" पढ़ने का शुरू किया। मुझे अच्छी लगी लेकिन व्यंग्य है इसलिए मुझे पुरी समझ नहीं आती। कोइ बात नहीं मेरे लिए। कई हिस्से का मतलब न समझता तो उसको स्किप देता। पर इस बार पढ़ते-पढ़ते मुझे सवाल आया कि क्या हो रहा है इस कहानी में? अलग-अलग प्रमूक थे और वे आपस में अलग-अलग विषयों पर बात कर रहे थे। किंतू इस के आगे बहुत नहीं हो रहा था। आम तौर पर ऐसी चीज़ चिंता का कारण नहीं है क्योंकि जो कहानी जिसका मतलब शुरू में साफ़ नहीं है इसका मतलब अंत में साफ़ हो जाएगी। लेकिन कहानी का अंत आ गया और मतलब साफ़ नहीं हो गया।

तो मेरी समझ में कहानी में ये चीज़ें हुईं थीं। अलग-अलग लोग ट्रेन में बैठे हुए चल रहे हैं। आदमी है, साधू है, नौजवान है, औरत है जो फ़िल्म-अक्त्रेस जैसी लगती है, आदि आदि। चरचा कर रहे हैं और कहानी के अंत में एक "स्वामी-जी" (साधू नहीं) अक्ट्रेस जैसी लगनेवाली को समझे रहे हैं कि "अपने प्रेम-भाव को किसी नश्वर शरीर तक केंद्रित नहीं करो सुंदरी।" ठीक है पर यह कहानी बहुत दिलचस्पी लगती है।

पर यह चीज़ भी थी कि सब लोगों को 'आत्मा' कहे जैसे कि "नौजवान आत्मा" या "साधू-आत्मा" आदि आदि। और 'आत्मा' का मतलब क्या है? मैने सोचा था कि महतब है मन की आवाज़ जैसी, अंग्रेज़ी में "soul". शायद बस है कि मैने धर्मशास्त्री की पढ़ाई से 'आत्मा' का मतलब जाया था क्योंकि हालाँकि यह मतलब सच है फीर भी किसी और मतलब हैं। एक है मृत्य के बाद व्यक्ति। इस चीज़ से कहानी में उलझन उठायी।

एक वाक्य से इस खोज पैदा किया। कहानी की शुरूआत में यहीं लीखती हुई है: "सामने एक नौजवान लड़का सिर लटकाए बैठा था। आत्माहत्या करके आया था--बेकारी के कारण।" तो क्या हो रहा था? मुझे 'आत्माहत्या' के मतलब की समझ आयी थी लेकिन अगर कोई व्यक्ति आत्महत्य करते तो उसकी देहांत होता न? मगर इस कहानी में यह 'नौजवान लड़का' बोलता रहता! तो क्या हो रहा है?

Thursday, December 01, 2005

Candy.

It's not Borges, of course. Here we are completely aware that we're reading fiction and that this is, more or less, a heavy psychedelic experience made concrete. But still, it's very fun.
Hallelujah!

For the first time in two years, I think I may be able to say that my heat works!

Now, maybe, I'll join the rest of the apartments in New York city and complain about all the heat I waste in my overheated apartment... I can dream...
World Map