नासमझ का फ़ायदा(
यह तो पहला पाठ है। दुसरा पाठ बाद में लीखूँगा)इस हाफ़्तेअंत मैने "अतृप्त आत्माओं की रेल-यात्रा" पढ़ने का शुरू किया। मुझे अच्छी लगी लेकिन व्यंग्य है इसलिए मुझे पुरी समझ नहीं आती। कोइ बात नहीं मेरे लिए। कई हिस्से का मतलब न समझता तो उसको स्किप देता। पर इस बार पढ़ते-पढ़ते मुझे सवाल आया कि क्या हो रहा है इस कहानी में? अलग-अलग प्रमूक थे और वे आपस में अलग-अलग विषयों पर बात कर रहे थे। किंतू इस के आगे बहुत नहीं हो रहा था। आम तौर पर ऐसी चीज़ चिंता का कारण नहीं है क्योंकि जो कहानी जिसका मतलब शुरू में साफ़ नहीं है इसका मतलब अंत में साफ़ हो जाएगी। लेकिन कहानी का अंत आ गया और मतलब साफ़ नहीं हो गया।
तो मेरी समझ में कहानी में ये चीज़ें हुईं थीं। अलग-अलग लोग ट्रेन में बैठे हुए चल रहे हैं। आदमी है, साधू है, नौजवान है, औरत है जो फ़िल्म-अक्त्रेस जैसी लगती है, आदि आदि। चरचा कर रहे हैं और कहानी के अंत में एक "स्वामी-जी" (साधू नहीं) अक्ट्रेस जैसी लगनेवाली को समझे रहे हैं कि "अपने प्रेम-भाव को किसी नश्वर शरीर तक केंद्रित नहीं करो सुंदरी।" ठीक है पर यह कहानी बहुत दिलचस्पी लगती है।
पर यह चीज़ भी थी कि सब लोगों को 'आत्मा' कहे जैसे कि "नौजवान आत्मा" या "साधू-आत्मा" आदि आदि। और 'आत्मा' का मतलब क्या है? मैने सोचा था कि महतब है मन की आवाज़ जैसी, अंग्रेज़ी में "soul". शायद बस है कि मैने धर्मशास्त्री की पढ़ाई से 'आत्मा' का मतलब जाया था क्योंकि हालाँकि यह मतलब सच है फीर भी किसी और मतलब हैं। एक है मृत्य के बाद व्यक्ति। इस चीज़ से कहानी में उलझन उठायी।
एक वाक्य से इस खोज पैदा किया। कहानी की शुरूआत में यहीं लीखती हुई है: "सामने एक नौजवान लड़का सिर लटकाए बैठा था। आत्माहत्या करके आया था--बेकारी के कारण।" तो क्या हो रहा था? मुझे 'आत्माहत्या' के मतलब की समझ आयी थी लेकिन अगर कोई व्यक्ति आत्महत्य करते तो उसकी देहांत होता न? मगर इस कहानी में यह 'नौजवान लड़का' बोलता रहता! तो क्या हो रहा है?