Tuesday, January 10, 2006

एक चिट्ठी पीज़्ज़ा पर:

अमित जी मुझे याद दिलाया कि पीज़्ज़ा अमरीकी व्यंजन नहीं है। बिलकुल हाँ, वह इटाल्वी हैं और दुनिया के सबसे पुराना दुकान नैपल्ज़ (नैपोली) में है।

लेकिन...

मेरी मन में दुनिया की सब से अच्छी पीज़्ज़ा हमेशा न्यू यॉर्क में होगी। यह हुआ क्योंकि बीसवी शताब्दी में इटाली के इतने लोगों ने अमरीका गए (ज़्यादातर न्यू यॉर्क और बोस्टोन में) कि उनसी परंपराएं अमरीका की परंपराओं का एक हिस्सा हो गया। और उन में से पीज़्ज़ा बहुत प्रसिध। लेकिन हालाँकि पूरे देष में पीज़्ज़ा खायी जाती है फ़ीर भी अमरीका की सब पीज़्ज़ा अच्छी नहीं हैं। जैसे कि नेब्रासका या मोन्टाना में सोचता हूँ कि बहुत अच्छी पीज़्ज़ा नहीं पायी जाएगी और जानता हूँ कि न्यू हैमप्शर में (जो मैसाचूसेट्स से उत्तर है, जहाँ मेरा जन्म हुआ) अच्छी पीज़्ज़ा नहीं हैं। अच्छी पीज़्ज़ा के लिए इटाली के लोग ज़रूरत हैं। एक उदाहरण यह है:



(यहाँ से)

और ज़्यादा ज़रूरत हैं यह आदमी:



(यहाँ से)

दुकान दीफ़ाराज़ हैं और ब्रूक्लिन में है। आदमी दोमिनिक देमार्को है और वह पीज़्ज़ा बनाने का संत है। चालीस साल से सिर्फ़ एक आदमी ने पीज़्ज़ा छुनी है और वह दोमिनिक है। मुझे मंदीर नहीं चाहिए, मस्जीद नहीं चाहिए, सिनागोग नहीं चाहिए, चर्च नहीं चाहिए। मुझे सिर्फ़ दिफ़ाराज़ चाहिए। जब मैं कहता हूँ कि यह दुनिया की सब से अच्छी पीज़्ज़ा हैं मैं जानता हूँ कि मैं सच बोल रहा हूँ। इतनी गम्भीर, इतनी अनंत है यह पीज़्ज़ा? क्या कहूँ? इसलिए मैं कहता हूँ कि भारत में किसी को पीज़्ज़ा बनाना नहीं आता जैसे कि न्यू हैम्पशर में किसि को नहीं पीज़्ज़ा बनाना आता हैं क्योंकि दोमिनिक कहाँ हैं? "पीज़्ज़ा हट" पीज़्ज़ा नहीं है, दोमिनोस पीज़्ज़ा नहीं नहीं है--सिर्फ़ दोमिनिक।

मैं इस विशय पर सदा के लिए बोल रह सकता हूँ लेकिन मुझे थक है, सोना हैं। और अब मैं थकत के हाल में सोयूँगा...

3 Comments:

Anonymous Amit said...

क्या दोमिनीक से पहले पिज्ज़ा नहीं बनता था? क्या इसके बाद कोई पिज्ज़ा नहीं बनाएगा? यह कहना कि पिज्ज़ा तो केवल दोमिनीक ही बना सकता है, मात्र आपका भ्रम है!! यह हो सकता है कि वह बहुत अच्छा पिज्ज़ा बनाता हो, लेकिन यह कहना कि अच्छा पिज्ज़ा केवल वही बना सकता है, केवल अपने से छल करना है।

"अच्छा" क्या है? वह केवल एक दृष्टिकोण है, और यह कतई ज़रूरी नहीं कि एक व्यक्ति का दृष्टिकोण दूसरे से मेल खाता हो। "अच्छा" वही है जो आपको पसंद आए, यदि वह दूसरे को पसंद नहीं आएगा तो वह उसे अच्छा नहीं कहेगा, परन्तु आप फ़िर भी कहेंगे क्योंकि आपको वह अच्छा लगा।

क्या आप कभी भारत आए हैं? यहाँ आकर पिज्ज़ा खाया है? यदि नहीं आए हैं तो यह वाद-विवाद ही निराधार है क्योंकि आप ऐसी बात कह रहे हैं जिसके बारे में आप कुछ जानते ही नहीं। और यदि आप यहाँ आए हैं और पिज्ज़ा खाया है तो अवशय ही किसी गली-नुक्कड़ के रेस्तरां में खाया होगा और अपनी राय कायम कर ली कि किसी को पिज्ज़ा बनाना ही नहीं आता!! इसलिए ऐसी तुच्छ बातें करना छोड़िए कि भारत में किसी को पिज्ज़ा बनाना नहीं आता!! अब आप यह कहेंगे कि इटली में तो किसी को पिज्ज़ा बनाना ही नहीं आता क्योंकि वहाँ दोमिनीक कहाँ है!! कल को आप कहेंगे कि भई डोसा तो अमेरिका में फ़लां जगह पर फ़लां बन्दा ही अच्छा बनाता है, भारत में तो किसी को बनाना ही नहीं आता, क्यों??!!

4:53 AM  
Blogger Greg Goulding said...

अमित जी,

क्या आप पिज़्ज़ा-दुकानवाले हैं? अगर नहीं, शायद भविष्य में आप बहुत अच्छा बनाएगे? कहता हूँ क्योंकि आपको पीज़्ज़ा से इतना ज़ोरदार है कि आप बहुत अच्छा पिज़्ज़ा बनाएं। पिज़्ज़ा परंपरा की बात है और इसलिए बहुत अच्छी पिज़्ज़ा ज़्यादातर इटली के लोगों से बनता है। लेकिन ज़ोरदार भी चाहिए और इसलिए एक व्यक्ति जो इटली से न्यू योर्क और तूरंत पिज़्ज़ा बनाने लगा और हर हाफ़ते सिर्फ़ पिज़्ज़ा बनाते। मेरे ख़्याल में सिर्फ़ उस जैसा पागलपन से बहुत-बहुत पिज़्ज़ बन सकता है।

हाँ, बिलकुल दृष्टिकोण है, और इस के बारे में न्यू योर्कर्स बड़ी बात कर सकते हैं और अंत में कुछ समझौता नहीं होगा। बस पिज़्ज़ा एक व्यक्तिगत बात है न? मैं ही भारत आया हूँ और छः महीने से दिल्ली में रहा। और वहाँ मैने पिज़्ज़ा खाया डिल्ली में, शिम्ला में, मुम्बाई में, और अलग-अलग दुसरे शहरों में और शायद बहुत अच्छा पिज़्ज़ा वहाँ जो मैने नहीं खाया। अगर है, तो जब मैं वपस जाऊँगा जून मैं तो आप मुझसे बताएं कि वह रेस्तराँ कहाँ है और अगर पिज़्ज़ा अच्छा है तो बहुत ख़ुशी होगी।

फ़ीर भी दोमिनिक से अच्छीं नहीं होगी अमित भाई :)। वही मेरी ख़्याल है आप अपनी ख्याल रखें लेकिन अगर आप कभी न्यू यॉर्क आएं तो हम दोनों साथ दिफ़ाराज़ में पिज़्ज़ा खायेगे और खाते-खाते अगर आप नहीं सोचेंगे कि वह दुनिया के सब से अच्छा है तो मैं पिज़्ज़ा का दुकान खोलेगे। और जब मैं अपना दुकान खोलूँ तब तो सब दुनिया एक बात पर समझौता करेगे कि मालुम नहीं दुनिया के सब से अच्छा पिज़्ज़ा-दुकान किसका है, मगर एक बात सब दुनिया के लोग जाएगे: ग्रेग गूल्डिंग के दुकान में सारी दुनिया के सब से बूरा पिज़्ज़ा बनता है :)

10:05 AM  
Anonymous ई-स्वामी said...

ग्रेग,

आपका मजेदार जवाब पढ कर मेरी हंसी नही रुक रही है.

बादाम (almond) की लकडी पर क्ले ओवन मे बने पिज्जा मुझे सबसे ज्यादा पसंद आते हैं - जो amerigo नाम के रेस्टोरेंट मे भी मिलते हैं. (amerigo.net - Almond Wood Smoked Chicken & Spinach with Sun-dried Tomatoes, ricotta cheese, and roasted garlic.)

फ़िर दूसरे नंबर पे मुझे शिकागो स्टाईल का डीप डिश पिज्जा पसंद है.

इस हिसाब से व्यक्तिगत राय तो मेरी भी यही है की भारत मे किसी को भी अच्छा पिज्जा बनाना नही आता. ये बात बिल्कुल १००% सही है. ;-)

2:58 PM  

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